उस ब्रह्म से प्रकट यह संपूर्ण विश्व है जो उसी प्राण रूप में गतिमान है। उद्यत वज्र के समान विकराल शक्ति ब्रह्म को जो मानते हैं, अमरत्व को प्राप्त होते हैं। इसी ब्रह्म के भय से अग्नि व सूर्य तपते हैं और इसी ब्रह्म के भय से इंद्र, वायु और यमराज अपने-अपने कामों में लगे रहते हैं। शरीर के नष्‍ट होने से पहले ही यदि उस ब्रह्म का बोध प्राप्त कर लिया तो ठीक अन्यथा अनेक युगों तक विभिन्न योनियों में पड़ना होता है।

ओमकार जिनका स्वरूप है, ओम जिसका नाम है उस ब्रह्म को ही ईश्‍वर, परमेश्वर, परमात्मा, प्रभु, सच्चिदानंद, विश्‍वात्मा, सर्व‍शक्तिमान, सर्वव्यापक, भर्ता, ग्रसिष्णु, प्रभविष्‍णु और शिव आदि नामों से जाना जाता है, वही इंद्र में, ब्रह्मा में, विष्‍णु में और रुद्रों में है। वहीं सर्वप्रथम प्रार्थनीय और जप योग्य है अन्य कोई नहीं।

 इन परमात्मा को देवगण भी नहीं जान सके। अंतत: उस ईश्वर की सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनि, ब्रह्मा, विष्‍णु, महेश, राम और कृष्ण आराधना करते हैं।

ईश्वर न तो भगवान है, न देवता, न दानव और न ही प्रकृति या उसकी अन्य कोई शक्ति। ‍ईश्वर एक ही है अलग-अलग नहीं। ईश्वर अजन्मा है। जिन्होंने जन्म लिया है और जो मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं या फिर अजर-अमर हो गए हैं वे सभी ईश्वर नहीं हैं। यही सनातन सत्य है।

  • Twitter
  • del.icio.us
  • Digg
  • Facebook
  • Technorati
  • Reddit
  • Yahoo Buzz
  • StumbleUpon

www.shabarmantraonline.com

Posted in Shabar Mantra Astrology, Vedic Astrology Tagged with: , , , , , , ,
3 comments on “
  1. Afsh says:

    Respectd swami g.plz tel me how i contrl mind of my sistr and my boyfriend with the help of mantra.mera boyfrnd gusa karta hay bht esa mantra day jis say wo bat manay pyear karay meray bagair na rae sakay.or meri sistr b bat manay meri.plz tel me.i shal be thankful 2 u.

  2. vijaya says:

    these mantras are really work

Leave a Reply